जब विकिरण (Radiation) किसी पदार्थ या परमाणु के साथ क्रिया करता है, तो यह मुख्य रूप से तीन प्रकार की प्रक्रियाओं में से किसी एक के रूप में दिखाई देता है। ये प्रक्रियाएँ आधुनिक भौतिकी और लेज़र (LASER) के सिद्धांत का आधार हैं।
विकिरण की पदार्थ के साथ क्रिया निम्नलिखित तीन प्रकार से होती है:
- उद्दीपित अथवा प्रेरित अवशोषण (Stimulated Absorption)
- स्वतः प्रवर्तित उत्सर्जन (Spontaneous Emission)
- उद्दीपित अथवा प्रेरित उत्सर्जन (Stimulated Emission)
उद्दीपित अथवा प्रेरित अवशोषण
हम जानते हैं कि कोई भी परमाणु केवल कुछ निश्चित ऊर्जा अवस्थाओं (Energy Levels) में ही रह सकता है। मान लीजिए किसी परमाणु के दो ऊर्जा स्तर हैं,
- E₁ → निम्न (सामान्य) ऊर्जा अवस्था
- E₂ → उच्च (उत्तेजित) ऊर्जा अवस्था
जहाँ E₂ > E₁
सभी परमाणु अपनी सामान्य अवस्था में E1 में रहते हैं, यदि कोई फोटोन जिसकी आवृति v है सामान्य अवस्था वाले परमाणु द्वारा अवशोषित कर लिया जाता है तो यह परमाणु उत्तेजित अवस्था में आकर E2 अवस्था में चला जाता है यह प्रक्रिया उद्दीपित अथवा प्रेरित अवशोषण कहलाती है, अवशोषित फोटोन को उद्दीपक फोटोन कहा जाता है,।
hν = E2−E1
परमाणु के उत्तेजित अवस्था में पहुंचने के बाद वह बहुत कम समय के लिए ही वहां पर रहता है तथा वह अपनी सामान्य अवस्था में आ जाता है।
स्वतः प्रवर्तित उत्सर्जन
कोई भी परमाणु अपनी उत्तेजित अवस्था (E₂) में अधिक समय तक नहीं रह सकता, कुछ समय बाद परमाणु स्वतः अपनी सामान्य अवस्था E₁ में लौट आता है। जब ऐसा होता है, तो अतिरिक्त ऊर्जा को बाहर निकालने के लिए परमाणु एक फोटोन उत्सर्जित करता है, इस प्रकार का विकिरण स्वतः प्रवर्तित उत्सर्जन कहलाता है। उत्तेजित फोटोन किसी भी दिशा में गति कर सकता है,

hν = E2−E1
मुख्य विशेषताएँ:
- उत्सर्जित फोटोन किसी भी दिशा में जा सकता है
- यह प्रक्रिया बिना किसी बाहरी प्रभाव के होती है
- उत्सर्जन की दर उत्तेजित अवस्था में मौजूद परमाणुओं की संख्या के समानुपाती होती है
उद्दीपित अथवा प्रेरित उत्सर्जन
यदि कोई परमाणु है पहले से भी अपनी उत्तेजित अवस्था में है उस पर कोई फोटोन गिरता है तो वह परमाणु मूल अवस्था में आ जाता है तथा इस क्रिया में दो फोटोन उत्सर्जित होते हैं, इस प्रकार के उत्सर्जन को उद्दीप्त अथवा प्रेरित उत्सर्जन कहते हैं। उत्सर्जित फोटोन कि दिशा उद्दीपित फोटोन की संचरण की दिशा में होती है तथा इन दोनों की ऊर्जा समान होती है।

इस प्रक्रिया में:
- दो फोटोन उत्सर्जित होते हैं
- दोनों फोटोन की
- ऊर्जा समान होती है
- आवृत्ति समान होती है
- दिशा समान होती है
- चरण (Phase) समान होता है
इसी प्रक्रिया को उद्दीपित अथवा प्रेरित उत्सर्जन कहते हैं और यही लेज़र क्रिया का आधार है।
विकिरण–पदार्थ क्रिया का महत्व
- लेज़र तकनीक का आधार
- आधुनिक ऑप्टिक्स में अत्यंत उपयोगी
- सेमीकंडक्टर एवं ऑप्टिकल डिवाइस में प्रयोग
- प्रतियोगी परीक्षाओं (NEET, JEE, बोर्ड) में महत्वपूर्ण विषय
Q&A
- उद्दीपित अथवा प्रेरित अवशोषण क्या है?
उत्तर: जब कोई परमाणु अपनी सामान्य अवस्था में रहते हुए आपतित फोटोन को अवशोषित कर उत्तेजित अवस्था में चला जाता है, तो इसे उद्दीपित अथवा प्रेरित अवशोषण कहते हैं।
- स्वतः प्रवर्तित उत्सर्जन क्या है?
उत्तर: जब कोई परमाणु उत्तेजित अवस्था से बिना किसी बाहरी प्रभाव के फोटोन उत्सर्जित कर सामान्य अवस्था में लौट आता है, तो इस प्रक्रिया को स्वतः प्रवर्तित उत्सर्जन कहते हैं।
- उद्दीपित अथवा प्रेरित उत्सर्जन क्या है?
उत्तर: जब उत्तेजित अवस्था में स्थित परमाणु पर समान ऊर्जा का फोटोन आपतित होता है और परिणामस्वरूप दो समान फोटोन उत्सर्जित होते हैं, तो इस प्रक्रिया को उद्दीपित उत्सर्जन कहते हैं।
- लेज़र क्रिया किस सिद्धांत पर आधारित है?
उत्तर: लेज़र क्रिया पूरी तरह उद्दीपित अथवा प्रेरित उत्सर्जन के सिद्धांत पर आधारित होती है।
- स्वतः और उद्दीपित उत्सर्जन में मुख्य अंतर क्या है?
उत्तर: स्वतः उत्सर्जन में फोटोन किसी भी दिशा में जाता है, जबकि उद्दीपित उत्सर्जन में सभी फोटोन एक ही दिशा और चरण में होते हैं।